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समय नेशनल यूपी/उत्तराखंड एमपी/छत्तीसगढ़ बिहार/झारखंड समय मुंबई एनसीआर/हरियाणा/राजस्थान आलमी सहारा
25 Feb 2009 05:01:15 PM IST
Last Updated : 30 Nov -0001 12:00:00 AM IST

खतरनाक माओवादियों की ताकत बढ़ी


नयी दिल्ली। मुंबई के आतंकवादी हमलों के लिए बाहरी आतंकवादियों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है लेकिन यह भी एक हकीकत है कि तमाम उपायों के बावजूद देश के भीतर माओवादियों का स्वरूप और भी खतरनाक हो गया है और उनकी ताकत में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है। इंस्टीट्यूट फार डिफेंस स्टडी एंड एनालिसिस (आईडीएसए) ने अपने स्ट्रेटजिक कमेंट में कहा है कि माओवादियों का स्वरूप देश में खतरनाक हो गया है और उनकी ताकत में इजाफा भी हुआ है। आईडीएसए के रिसर्च फेलो पीवी रमण ने बताया कि प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी बार-बार देश की आधारभूत संरचनाओं को निशाना बना रहे हैं। उनके निशाने पर मुख्य रूप से जनसंचार टावर रेलवे विद्युत पारेषण केंद्र तथा लाइन इत्यादि शामिल है। रमण के मुताबिक वर्ष 2007 में जहां जनसंचार के टावरों पर सात हमले हुए थे वह बढ़ कर वर्ष 2008 (30 नवंबर तक) में 43 हो गये। इनमें सर्वाधिक हमले बिहार और छत्तीसगढ़ में हुए। दोनों राज्यों में 14 टावरों को निशाना बनाया गया। रमण ने कहा कि पिछले तीन महीने में माओवादियों ने बिहार में सभी मुख्य कंपनियों के सेलुलर जनसंचार टावर पर हमला किया। इसमें भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) का टावर भी शामिल है। इसके अलावा उसने रिलायंस कम्युनिकेशन्स एयरटेल आदि के टावरों पर भी हमला किया। माओवादियों ने इन हमलों को क्रमश: रोहतास गया तथा औरंगाबाद जिले में अंजाम दिया। रमण ने कहा वर्ष 2005 से 30 नवंबर 2008 तक माओवादियों ने पूरे देश में ऐसे कुल 62 टावर पर हमला कर उन्हें क्षतिग्रस्त कर दिया। एक सवाल के उत्तर में रमणा ने कहा कि माओवादी इसलिए इन टावरों को निशाना बनाते हैं ताकि सुरक्षा बलों के बीच आपसी संपर्क टूट जाए और अपने नापाक मंसूबों को अंजाम दे सकें। उन्होंने यह भी कहा कि माओवादियों ने वर्ष 2007 में रेलवे पर 26 हमले किये जबकि उससे पिछले साल इन हमलों की संख्या नौ थी। इससे रेलवे को कम से कम पांच करोड़ रुपये की क्षति हुई। उन्होंने कहा कि रेलवे पर माओवादियों का यह हमला पिछले साल भी जारी रहा। अप्रैल के पहले दो हफ्ते में माओवादियों ने रेलवे पर तीन हमले किये। इन सभी वर्षों में माओवादियों ने ट्रेन पर कब्जा रेलवे स्टेशनों और वैगनों को आग लगाने रेलवे कर्मचारियों का अपहरण तथा रेलवे सुरक्षा बलों से उनका हथियार लूट लेने जैसे अपराधों को अंजाम दिया। छत्तीसगढ़ में कई बार माओवादियों ने रेलवे ट्रैक को उड़ाया तथा बिजली पारेषण केंद्रों पर भी हमला किया। इन केंद्रों पर हमला किये जाने से रेल यातायात लौह अयस्क खान और अस्पतालों में काम काज प्रभावित हुआ। इससे लगभग दो हजार करोड़ रुपये की क्षति हुई। यह पूछे जाने पर कि केंद्र और संबंधित सरकारों द्वारा किये जा रहे उपायों के बावजूद माओवाद समाप्त क्यों नहीं हो रहा है रिसर्च फैलो ने कहा राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव पुलिस प्रशिक्षण का अभाव प्रदेश सरकारों की अस्थिरता आदि कुछ मुख्य कारण हैं।


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