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तमिलनाडु/कालपेट्टा। तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के कुछ भागों में फैले नीलगिरी जैवमंडल के कुछ भागों में समुचित बारिश की कमी से नालों और नदियों के सूखने तथा बांस के झुरमुटों के सिकुड़ने के चलते वहां दावानल का खतरा पैदा हो गया है। इस क्षेत्र में पहले ही आग लगने की मामूली घटनाएं हो चुकी हैं।
इसलिए वन विभाग केरल के वायनाड जिले में अग्निसुरक्षा के उपाय कर रहा है और वन क्षेत्र के आस-पास की बस्तियों में रहने वाले लोगों को शामिल कर वन बचाव समितियों को सक्रिय कर रहा है। केरल के वन मंत्री विनय विश्वम ने बताया कि स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय दूर संवेदी एजेंसी और इसरो से तकनीकी सहयोग मांगा गया है। अंतरिक्ष संस्था ने इनसे निपटने के लिए सहयोग की पेशकश की है।
दक्खन के पठार के पूर्वी भाग में स्थित नीलगिरी जैवमंडल के अंतर्गत तमिलनाडु का मदुमलई बाघ रिजर्व कर्नाटक का बांदीपुर और नगरहोल तथा केरल का वायनाड आता है।
वन्यजीव अधिकारियों ने यहां बताया कि वायनाड के कुछ भागों को छोड़कर शेष क्षेत्रों में जाड़े और गर्मियों में अल्प बारिश हुई है जिससे वन्य प्राणी जल और आश्रय की तलाश में वायनाड के कबानी थाले की ओर निकल सकते हैं।