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13 Feb 2009 11:07:21 AM IST
Last Updated : 30 Nov -0001 12:00:00 AM IST

मायावती की आय का आंकलन फिर हो


नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने आयकर विभाग को उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती की वित्त वर्ष 2001-02 के दौरान की आय का पुन आकलन करने की अनुमति दे दी। न्यायमूर्ति विक्रमजीत सेन की अध्यक्षता वाली पीठ ने बसपा सुप्रीमो मायावती के उस आग्रह को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने आयकर विभाग को अपनी आय का पुन आकलन करने से रोकने की मांग की थी और दावा किया था कि इस बारे में उन्हें पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया। अदालत ने आदेश पारित करते हुए कहा कि मायावती अपना मामला साबित करने में विफल रही हैं। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री ने वित्त वर्ष 2001-02 के दौरान अपनी आय के पुन आकलन के आयकर विभाग के फैसले को अदालत में चुनौती दी थी। मायावती ने अपनी याचिका में दावा किया था कि उन्हें आयकर विभाग से कोई नोटिस नहीं मिला जो आय के पुन आकलन के लिए आयकर कानून के तहत आवश्यक होता है। इससे पूर्व सात जनवरी को उन्होंने बिना नोटिस के अपनी आय के पुन आकलन को लेकर आयकर विभाग की निन्दा की थी। विभाग की प्रक्रिया पर रोक के निर्देश के आग्रह के साथ उन्होंने दावा किया था आयकर विभाग ने मेरे खिलाफ कोई नोटिस जारी किए बिना ही प्रक्रिया शुरू कर दी जो कानूनी तौर पर आवश्यक होता है। आयकर विभाग ने मायावती के दावे से इंकार किया और कहा पिछले साल 24 मार्च को दिल्ली के हुमायूं रोड स्थित उनके आवास के पते पर नोटिस भेजा गया था लेकिन वह लखनउ चली गईं। इसके बाद नोटिस नेहरू रोड के पते पर भेजा गया। फिर इसे कालीदास रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास के पते पर भेजा गया लेकिन यह विभाग के पास वापस आ गया। मायावती उच्च न्यायालय में आकलन वर्ष 2003-04 के लिए भी कर चोरी के मामले का सामना कर रही हैं जो आयकर अपीलेट न्यायाधिकारण के फैसले के खिलाफ आयकर विभाग द्वारा जारी किया गया था। न्यायाधिकारण ने नवम्बर 2007 में कहा था कि मायावती के समर्थकों ने उन्हें 65 लाख रुपये के उपहार प्यार और लगाव के चलते दिए थे जो आयकर के दायरे में नहीं आते। केंद्र ने हालांकि कहा कि न्यायाधिकरण ने आय के सोत के बारे में मायावती द्वारा दी गई जानकारी को स्वीकार कर गलती की। बसपा नेता को मिली नकदी तथा संपत्ति को वार्षिक आयकर के दायरे में माना जाना चाहिए।


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