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पपीता एक ऐसा गुणकारी फल है, जो मिलने में जितना आसान है उतना ही लाभदायक और सौंदर्यवर्द्धक भी है। आधा पका पपीता पीस कर चेहरे पर नित्य लेप करके एक घंटे बाद धोयें। कील, मुंहासे, झुर्रियां दूर होकर चेहरा सुन्दर हो जायेगा। ऐसा दो माह करें। लंबे समय तक नित्य पपीता खाने से चर्बी कम होती है और कमर का सौंदर्य बढ़ता है।
पपीता पेट के रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। पपीता पेट साफ करता है। यकृत को ताकत देने वाला है। छोटे बच्चे जिनका यकृत खराब होता है, उन्हें पपीता खिलाना चाहिए। पेट के रोगों के लिए पपीता कारगर फल है। कब्ज, अजीर्ण और रक्तस्रावी बवासीर में पका हुआ पपीता लाभदायक है। पपीते के दस बीज पानी में पीस कर चौथाई कप पानी में मिलाकर पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। एक हफ्ते इसका नित्य प्रयोग करें।
उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखने के लिए सुबह खाली पेट चार फांक पका हुआ पपीता दो-तीन महीने खाते रहें। पपीते का दूध दाद पर लगाने से लाभ होता है। तिल्ली व पीलिया में नियमित पपीता खाने से लाभ होता है। सुबह पपीता खाकर दूध पीने से कब्ज दूर होता है।
पपीता खाने से मूत्राशय के इंफेक्शन में भी फायदा मिलता है। हर प्रकार के बवासीर में पका हुआ पपीता नित्य खाने से लाभ होता है। पपीता खाने से पेशाब अधिक आती है। जोड़ों के दर्द के रोगी पपीता नित्य खाएं। यह वात दर्द का शमन करता है।
अपच, अम्लपित्त, प्लीहा (स्पिलीन) बढ़ जाये तो खाली पका हुआ पपीता स्वाद के लिए काली मिर्च, काला नमक, सैंधा नमक डाल कर कुछ सप्ताह खायें, पेट के रोगों में लाभ होगा। उद्योग, यातायात में डीजल आदि के धुएं से वायुमंडल दूषित होता है। सांस लेने में दम घुटता है। पपीता के ताजे बीज रुमाल में रख कर सूंघते हुए यात्रा करें। ताजा बीज नहीं हो तो सूखे बीज पानी में भिगोकर काम में लें। पपीता खायें। पपीता प्रदूषण के दुष्प्रभावों से बचाता है। नवजात बच्चे के लिए मां का दूध लाभकारी होता है लेकिन कई बार ऐसा होता है कि स्तनों में दूध की कमी से बच्चा इस लाभ से वंचित हो जाता है। ऐसी मां कच्चे पपीते की सब्जी खाएं। इससे स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।
पका हुआ पपीता खाने से भी दूध बढ़ता है। जिन महिलाओं और लड़कियों का मासिक धर्म अनियमित है, देर से या जल्दी आता है, मासिक स्राव में दर्द होता है। पपीते से सूखे बीज पीस कर आधा चम्मच सुबह-शाम गर्म पानी से फक्की मासिक स्राव आने के एक सप्ताह पहले से आरंभ करके मासिक धर्म का स्राव बन्द होने तक दो तीन महीने लेते रहने से मासिक धर्म के दोष दूर होकर मासिक धर्म आने लगता है। दक्षिण भारत की औरतों का विश्वास है कि पपीते में गर्भ गिराने के शक्तिशाली गुण हैं। गर्भावस्था में पपीता नहीं खाना चाहिए।