सीआईए और पाकिस्तान की आधी से ज्यादा आबादी के मुताबिक बहुत जल्द पाकिस्तान का बंटवारा होने वाला है। हथियार के सहारे जिंदगी बिता रहे तालिबानी जेहाद के नाम पर आतंक फैला रहे हैं। आतंकवादियों और कट्टर पंथियों की करतूतों से हालात ये बन गए हैं कि पाकिस्तान में ये आवाजें उठने लगी हैं कि क्यों न इसे कई टुकड़े में तोड़ दिया जाये। और अगर एक बार ये टूटफूट शुरू हुई तो पाकिस्तान के पांच टुकड़े होना तय है।
जी हां, पख्तूनिस्तान, बलूचिस्तान, सिधुदेश, और जिन्हापुर उन देशों के नाम हैं जिनकी मांग पाकिस्तान में एक जमाने से चल रही है लेकिन अब हालात ये आ गये हैं कि पाकिस्तान को दुनिया एक विफल मुल्क कहने लगी है। पाकिस्तान के उन लोगों को जो नई सोच रखते हैं और सुकून के साथ खुद को आगे बढ़ाना चाहते हैं, अब सोचने लगे हैं कि कुछ कट्टर पंथियों और आतंकवादियों के सामने उनके आगे बढ़ने के तमाम इरादे टूट रहे हैं। इसलिए उठी है पाकिस्तान में मांग अलग आजाद पांच मुल्कों की इस बंटवारे के बाद पाकिस्तान रह जायेगा और कहलायेगा पंजाबिस्तान इसकी वजह भी है।
दरअसल पाकिस्तान की राजनीति और उसकी सेना पर हमेशा से ही पाकिस्तानी पंजाब प्रांत के लोगों का बोलबाला रहा है। बात चाहे परवेज मुशर्रफ की हो या जनरल कियानी की पाकिस्तान फौज के अफसरान पंजाब के ही हैं। लिहाजा ये अफसर इसी प्रांत के लोगों को तवज्जो देते हैं। ये बात अक्सर सिंधियों हैदराबादियों और कराची के उर्दू बोलने वालों को चुभती रही है। क्योंकि ये वो इलाके हैं जहां से देश को करीब 60 फीसदी टैक्स रेवेन्यू हासिल होता है। इसके अलावा अमन पसंद पाकिस्तानियों को पंजाब प्रांत से आने वाले हुक्मरानों से भी अब उम्मीदें नहीं रहीं।
वजह ये है कि एक जमाने से तीन जंगें लड़ कर देश को तरक्की के मामले में पंद्रह साल पीछे फेंकने के बाद भी पाकिस्तानी हुक्मरान ऐसा कुछ हासिल नहीं कर पाये हैं जो मुल्क के लिये फक्र की बात कहा जा सके। उल्टा तालिबानियों और आतंकवादियों को पनाह देने से पाकिस्तानियों को पूरी दुनिया में शक की निगाह से देखा जाने लगा है बार-बार जंग की बात कहकर पाकिस्तान सरकार लोगों को एकजुट होने का झूठा दिलासा देती है क्योंकि यही वह मौका होता है जब सरकारी फौजों से लड़ रहे तालिबान भी एकजुट होकर मुल्क के लिए लड़ने की बात कह देते हैं।
आतंकवाद को शय देने की वजह से आज हालत यह हैं कि मुल्क में कट्टर पंथियों की ताकत इतनी बढ़ गई है कि अब वे किसी मस्जिद में घुस कर सरकारी फौजों पर गोले फेंकते हैं। साफ है जिस मुल्क में ऐसे हालत हैं वहां तरक्की की बात सोचना भी पागलपन है। पाकिस्तान में सबसे बड़ा तबका है उन लाखों तालिबानियों का जो अफगानिस्तान से रिफ्यूजी बन कर पाकिस्तान में दाखिल हुए वे खुद को पाकिसतानी मानते ही नहीं हैं लिहाजा उनसे तरक्की की बात करना बेकार ही है। लेकिन वे दूसरे मुल्क में होकर उसे अफगानिस्तान बनाने में जरूर जुटे हैं।
ऐसे बलूची भी 80 लाख से ज्यादा हैं जो खुद को वैसे तो ईरानी मानते हैं। लेकिन रहते पाकिस्तान के सबसे बड़े इलाके में हैं। ये लोग पाकिस्तान की तरक्की के लिए कुछ नहीं करते, लेकिन कट्टरवाद फैलाने में इनका कोई मुकाबला नहीं। इनका इलाका यानी बलूचिस्तान पाकिस्तान के कुल इलाके का 30 फीसद है। सारा-सारा दिन बंदूकें लेकर घूमने वाले पख्तून भी ऐसे ही नाकारा लोग हैं जो पाकिस्तान को कट्टरवाद का घर बनाने में जुटे हैं।
ये लोग कानून और सरकारी फरमानों को नहीं मानते इसलिए सरकार चाहकर भी इनका कुछ नहीं कर सकती। देश का करीब 50 फीसद इलाका ऐसा है जो पूरी तरह सरकार के कब्जे से बाहर है। अमरीका को सौंपी अपनी ताजा रिपोर्ट में यूएस की खुफिया एजेंसी सीआईए ने यही सिफारिशें रखी हैं कि अगर पाकिस्तान को टुकड़े में नहीं बांटा गया तो ना तो वह कभी तरक्की कर पायेगा और ना ही कभी अमरीका का आतंक के खिलाफ जंग खत्म होगा। टिप्पणियां (0 भेज दिया):
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