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नागपुर। भाजपा ने गांधीगिरी पर अपना हक जताते हुए दावा किया कि महात्मा गांधी के विचारों का सच्चा अनुसरण भगवा पार्टी ही कर रही है और उनका नाम जपने वाली कांग्रेस के शासनों में ब्रिटिश राज की गंध अधिक रही है।
भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने यहां चल रही पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद की बैठक में अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि कांग्रेस के पास गांधी का क्या है। आज कांग्रेस में सिर्फ एक परिवार से जुड़ा गांधी का नाम है और इसके अलावा गांधी से जुड़ा कुछ भी नहीं है।
उन्होंने कहा कि गांधी से जुड़े सारे काम आज भी अगर कहीं दिखाई देंगे तो कांग्रेस के उस परिवार में नहीं बल्कि हमारे परिवार में दिखेंगे। वहां सिर्फ नाम है यहां वास्तविक काम है। सिंह ने कहा कि गांधी के मूल्यों और विचारों का कोई भी लक्षण आज की कांग्रेस में नजर नहीं आता।
भाजपा अध्यक्ष ने सवाल उठाया कांग्रेस ने 50 वर्षों तक जिन नीतियों पर देश चलाया उसमें गांधीवाद कितना था। कांग्रेस की नीतियों में ब्रिटिश राज का तत्व अधिक था और गांधी के हिंद स्वराज का तत्व गायब था।
राजनाथ सिंह ने कहा गांधीजी ने हिंदू स्वराज में सभ्यताओं के बीच संवाद की बात कही थी लेकिन महात्मा गांधी के स्वयंभू उत्तराधिकारी यानी कांग्रेस के लोग तो इस देश में ही आपसी वैमनस्य खड़ा करने में लगे हैं तो विश्व में उनके नेतृत्व में भारत सभ्यताओं का संघर्ष कैसे समाप्त करा सकता है।
उन्होंने कहा कि गांधीवाद के मूल्य आज सामाजिक आर्थिक कूटनीतिक आदि सभी स्तरों पर अधिकाधिक प्रासंगिक हो रहे हैं।
सिंह ने कहा आज के कांग्रेस के चिंतन में न हिंद स्वराज है न ग्राम स्वराज है न गांव का स्थान है न किसान का सम्मान है न स्वदेशी कुटिर उद्योग हैं और न त्याग तथा वैराज्ञ का जीवन जीने वालों से जुड़ा कोई वर्ग है।
कांग्रेस पर प्रहार जारी रखते हुए उन्होंने कहा उसमें न स्वदेशी शैली है न स्वदेशी भाषा है और इतना ही नहीं गांधी के कर्मवाद की प्रतीक गीता साम्प्रदायिक है गांधी के रामराज्य के राम भी साम्प्रदायिक है।
उन्होंने दावा किया कि गांधी के विचारों पर आधारित ये सब अगर आज भी कहीं देखने को मिलेगा तो वह भाजपा की सोच और हमारे परिवार के कई संगठनों की सादगीपूर्ण जीवनशैली में होगा।
सिंह ने विकास का माडल युवा शक्ति पर आधारित बनाने की वकालत करते हुए कहा कि भारत के युवाओं के लिये आर्थिक विकास से लेकर सामाजिक बौद्धिक भावनात्मक नैतिक और आध्यात्मिक विकास का एक माडल महात्मा गांधी ने दिया था।