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अहमदाबाद। पांच दिन से गायब गुजरात की मंत्री माया कोडनानी गोधरा पश्चात हुए दंगों के मामले में कल अदालत द्वारा अग्रिम जमानत मिलने के बाद आज सामने आयीं। उन्हें भगोड़ा घोषित किया गया था।
उच्च शिक्षा मंत्री कोडनानी को उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल ‘एसआईटी' ने सोमवार को भगोड़ा घोषित किया था जिसके बाद उनका पता नहीं लगाया जा सका। कोडनानी के सचिव ने बताया कि वह गांधीनगर में अपने आधिकारिक आवास पर हैं और बैठक में हैं। सोमवार से कोडनानी के स्टाफ सदस्य कह रहे थे कि वह यात्रा पर हैं। जब कोडनानी से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा मैं कुछ भी नहीं कहना चाहती।
एसआईटी ने कोडनानी को नरोदा पाटिया और नरोदा गाम दंगों के मामलों में 29 और 31 जनवरी को तलब किया था लेकिन वह नहीं आयीं जिसके बाद उन्हें भगोड़ा घोषित किया गया।
एसआईटी ने अपने हलफनामे में कहा है कि करीब 15 गवाहों के मुताबिक कोडनानी नरोदा पाटिया इलाके में मौजूद थीं और भीड़ को भड़का रहीं थीं। एसआईटी के समक्ष गवाहों ने कहा था कि उन्होंने देखा कि कोडनानी लोगों को कैरोसिन बांट रहीं थीं जिसे वह अपनी गाड़ी में लेकर आयीं थीं। अदालत ने माया और पूर्व विहिप नेता जयदीप पटेल को 90 दिन की अग्रिम जमानत देकर राहत दी लेकिन उनसे कहा कि देश छोड़कर नहीं जायें तथा जांच के दौरान सहयोग दें। पटेल पर भी भीड़ को भड़काने का आरोप है।
अदालत ने माया को यह भी निर्देश दिया कि वह जब तक शहर के नरोदा इलाके मे नहीं घुसें जब तक कि एसआईटी दोनों मामलों में आरोप पत्र दाखिल नहीं कर दे। गुजरात में फरवरी 2002 में गोधरा ट्रेन कांड के बाद भीड़ ने नरोदा पाटिया तथा नरोदा गाम में अल्पसंख्यक समुदाय के 95 से अधिक लोगों को मार दिया था और उनकी संपत्ति तहस-नहस कर दी थी।