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उपभोक्ता मामलात मंत्रालयों के सचिव राजीव अग्रवाल ने कहा कि यद्यपि इस साल दालों की कीमतों में कोई खास तेजी आने की संभावना नहीं है. लेकिन गैरपरंपरागत देशों में दाल की बढ़ती खपत चिंताजनक है क्योंकि भारत अपनी जरूरत पूरी करने के लिए आयात पर निर्भर है. अग्रवाल ने यहां दाल बाजार पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ग्लोबल पल्सेस कनक्लेवे का उद्घाटन करने के बाद कहा कि सरकार दालों का उत्पादन बढाने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही हैं. इस तीन दिवसीय सम्मेलन का आयोजना दालों और अन्य अनाजों का व्यापार करने वाली फर्मों के मंच इंडियन पल्सेज एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (आईपीजीए) ने किया है. इस बीच मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज :एमसीएक्स: के चेयरमैन वेंकटचारी ने दलहनों की खेती के प्रति किसानों को आकषिर्त करने के लिए इसका सही मूल्य दिलाने में वायदा बाजारों की बड़ी भूमिका को रेखांकित किया. उन्होंने दालों में वायदा कारोबार फिर से शुरू करने की अनुमति देने का आग्रह किया. हालांकि अग्रवाल ने इस मुद्दे पर किसी तरह का आासन नहीं देते हुए कहा कि सरकार इनके लिए दूसरे कदम उठा रही है ताकि दलहनों की खेती को बढावा दिया जा सके. सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को आईपीजीए के अध्यक्ष प्रवीण डोंगरे और उपाध्यक्ष विमल कोठारी ने भी संबोधित किया. सम्मेलन में देश विदेश के जिंस व्यापारी, विशेषज्ञ और नीति नियामक भाग ले रहे हैं.
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