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आपूर्ति में कमी, चाय बगानों के श्रमिकों के पगार बढ़ने और लागत खर्च में वृद्धि के चलते चाय की कीमत थोड़ी बढ़ सकती है. उद्योग जगत के एक सूत्र के मुताबिक इस साल देश में खुदरा सीटीसी (क्रश-टीयर-कर्ल) चाय की कीमत प्रति किलो 10 रुपये तक बढ़ सकती है. चाय कम्पनी गुडरिक समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक अरुण एन. सिंह ने कहा, "अच्छी गुणवत्ता वाली सीटीसी चाय की आपूर्ति अभी कम है. इसलिए इस वेरायटी की चाय की कीमत अधिक रहेगी. इससे घरेलू खुदरा बाजार में सीटीसी चाय की कीमत बढ़ जाएगी." सिंह ने कहा, "दिसम्बर 2011 में सीटीसी की नीलामी 170 रुपये से 200 रुपये प्रति किलो के बीच हुई थी. इस बार यह 10 से 15 रुपये प्रति किलो अधिक रह सकती है." सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल के चाय बागानों में श्रमिकों की मजदूरी में संशोधन करने से प्रति किलो चाय छह से आठ रुपये तक महंगी हो जाएगी. सिंह ने कहा कि चाय उत्पादन में लागत खर्च भी बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि चाय नीलामी मूल्य बढ़ने, श्रमिकों का पगार बढ़ने और लागत खर्च बढ़ने के कारण प्रति किलो चाय 10 रुपये प्रति किलो तक महंगी हो सकती है. पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के पहाड़ी क्षेत्र डुअर्स में 153 चाय बागान हैं और इसके अलावा तराई इलाके में 42 बागान हैं. इन सभी को मिलाकर राज्य में सालाना 23 करोड़ किलो चाय का उत्पादन होता है. भारतीय चाय एसोसिएसन के अध्यक्ष सी.एस.बेदी ने कहा कि आपूर्ति में कमी की वजह से चाय के दाम प्रति किलो 10 रुपये बढ़ने की संभावना है. दुनिया की सबसे बड़ी चाय उत्पादक कंपनी मैकलियोड रसेल इंडिया लि. के मुख्य वित्त अधिकारी कमल बहेती ने कहा कि पिछले तीन-चार सालों से चाय उत्पादन स्थिर है जबकि मांग में करीब तीन फीसदी का इजाफा हुआ है जिसकी वजह से आपूर्ति का अभाव बना हुआ है. देश में वर्ष 2011 में चाय का कुल उत्पादन 99 करोड़ किलो होने का अनुमान है.
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