Twitter Facebook YoutubeRSS
Spacer
Samay Live
बृहस्पतिवार, 17 मई, 2012 |
समय नेशनल यूपी/उत्तराखंड एमपी/छत्तीसगढ़ बिहार/झारखंड समय मुंबई एनसीआर/हरियाणा/राजस्थान आलमी सहारा
07 Feb 2012 12:08:54 AM IST
Last Updated : 07 Feb 2012 12:08:54 AM IST

नामों की बड़ी महिमा

आलोक पुराणिक
लेखक
नामों की बड़ी महिमा
नामों की बड़ी महिमा

 

कश्मीर से यद्यपि उसका कोई ताल्लुक नहीं लग रहा था और कली से तो उसका दूर-दूर तक का कोई कनेक्शन नहीं दिख रहा था.

फिर भी उस भदेस से ट्रक पर सुंदर अक्षरों में लिखा था-कश्मीर की कली.

दिल्ली में नारायणा में कबाड़ का बड़ा बाजार है. सच पूछें तो वह ट्रक उसी बाजार में बिकने योग्य आइटम लग रहा था, एकदम खचाड़ा टाइप का. पर नहीं साहब, नारायणा का कबाड़ ट्रक कश्मीर की कली हुए जा रहा था. उफ्फ, कश्मीर की सारी कलियां एक साथ दिल्ली में यमुना में छलांग लगा जायें, अगर ये वाला सीन देख लें तो!

नामों से बड़ा कनफ्यूजन मच जाता है जी! एक ट्रक के पीछे लिखा था- टाटानगर से चली मैं कलकत्ता में श्रृंगार हुआ, करनाल में हुई सगाई, दिल्ली में प्यार हुआ.

सोलह पहियों वाला लंबा चौड़ा ट्रक, अरे राम! तेरा श्रृंगार! हाय-हाय ब्यूटी पार्लर वालियां तो सिर ही पीट लेंगी. कायदे से ऐसे विराटकाय ट्रक का नाम तो होना चाहिए दैत्य लंबकर्ण या दैत्यराज शंबूभंभ. पर जी नहीं, यह तो करनाल में सगाई करवा रहे हैं और दिल्ली में प्यार कर रहे हैं. दिल्ली वाले बहुत प्यारे हैं, हर तरह का प्यार झेल जाते हैं जी! वैसे इस मामले में सगाई के बाद का जो प्यार है, वह उसी कैंडीडेट से है या कोई एक्स्ट्रा मेरिटल मामला है, यह क्लियर नहीं हुआ. महिला शक्ति को इस मसले पर आपित्त दर्ज करानी चाहिए. मतलब ट्रक को और वह भी ऐसे खचाड़ा किस्म के ट्रक को स्त्रीलिंग घोषित किया जा रहा है.

एक काले रंग के ट्रक के नामकरण के बारे में मेरी सलाह ली गयी, तो मैंने कहा सुझाव दिया कि इसका नाम रखा जाए काला राकेट. इस नाम को पेंट करने वाले का नाम था कालूजी. सो उन्होंने ट्रक में काला की जगह कालू लिख डाला. नाम यूं चल पड़ा- कालू राकेट और ट्रक का स्टेटस एकदम डाऊन हो गया. दूसरी तरफ मुझे लगा कि राकेट उड़ाने वाली संस्था इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन यानी इसरो को भी यह पढ़कर बुरा लग सकता है.

इस मसले पर कन्फ्यूजन हैं और बड़े बड़े कन्फ्यूजन हैं जी! पाकिस्तान की खतरनाक सी दिखने वाली एक पनडुब्बी पर लिखा था- गौरी. अंगरेजी वर्णो में लिखा था- जीएयूएआरआई. गौरी अपने रूप-रंग में अति ही प्रहारक और मारक सी लग रही थी. एक इंडियन बंदे ने देखकर उसे गांव और गोरी वाली गोरी समझा और कहने लगा- हाय पाकिस्तान में गोरियां क्या ऐसी होती हैं. 

क्या पाकिस्तान की गोरियां ही पीट देंगी इंडियन सैनिकों को! वह तो बाद में समझ में आया कि पाकिस्तान ने अपनी इस पनडुब्बी का नाम मुहम्मद गोरी के नाम पर रखा था, जिसने भारत पर आक्रमण किया था. यह सुनने पर उस बंदे ने आगे पूछा-तो क्या मुहम्मद गौरी की सेना इतनी एडवांस्ड थी कि उसके पास उस जमाने में पनडुब्बी थी. हथियारों के बारे में मेरा अज्ञान प्रखर है.

इसलिए इस विषय पर कुछ भी कहने का आत्मविास आ गया है. मैंने कहा नहीं, यह पनडुब्बी थी तो इंडियन साइड की लेकिन मुहम्मद गौरी की साइड वाले तो चुरा कर ले गये थे.

पाकिस्तान वाले हमेशा के चोर रहे हैं, परमाणु बम तक उन्होने चोरी से बनाया था-साथ वाले ने घोषणा की.

एक मिसाइल पर लिखा था-धनुषटंकार.

अरे यार, इक्कीसवीं सदी के एडवांस युग में हो और प्रचीन काल के धनुष वगैरह की बात करते हो. मनोबल गिराने की बातें हैं ये तो जी! मतलब परमाणु संहार के इस युग में आप धनुष टनटनाते घूम रहे हैं. नाम बदलिए, प्लीज!  बताइए, क्या गलत कर रहा हूं मैं. 


 

Tools: Print Print Email Email



vvv

 

Facebook

Twitter

Youtube

RSS

Spacer